काल भैरव जयंती 2026 कब है? 1 दिसंबर — तिथि, पूजा विधि और महत्व

Kaal Bhairav Jayanti 2026 kab hai, date, puja vidhi — Kalashtami

संक्षिप्त उत्तर

काल भैरव जयंती 2026 मंगलवार, 1 दिसंबर को है। नई दिल्ली के अनुसार अष्टमी तिथि 1 दिसंबर रात 12:11 बजे शुरू होकर उसी दिन रात 11:13 बजे समाप्त होगी। यह पर्व मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी (पूर्णिमांत; अमांत कैलेंडर में कार्तिक कृष्ण अष्टमी) को मनाया जाता है। काल भैरव भगवान शिव का उग्र रूप हैं और काशी के कोतवाल माने जाते हैं।

तारीख
1 दिसंबर 2026, मंगलवार
अष्टमी तिथि
1 दिसंबर रात 12:11 → रात 11:13
माह
मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी (पूर्णिमांत)
अन्य नाम
काल भैरव अष्टमी, भैरव जयंती
मंत्र
ॐ काल भैरवाय नमः
वाहन
श्वान (कुत्ता)
देवराजसेव्यमानपावनाङ्घ्रिपङ्कजं व्यालयज्ञसूत्रमिन्दुशेखरं कृपाकरम्। नारदादियोगिवृन्दवन्दितं दिगम्बरं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥

जिनके पवित्र चरण-कमलों की सेवा देवराज इंद्र करते हैं, जो सर्प को यज्ञोपवीत की तरह धारण करते हैं, जिनके मस्तक पर चंद्रमा है, जो कृपा के सागर हैं, और नारद आदि योगी जिनकी वंदना करते हैं — उन दिगंबर, काशी नगरी के स्वामी काल भैरव को मैं भजता हूँ।

— कालभैरवाष्टकम्, श्लोक 1 (आदि शंकराचार्य को परंपरा से मान्य)

काल भैरव जयंती पूजा विधि

  1. सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें।
  2. शिव जी और काल भैरव की पूजा करें; भैरव जी को सरसों के तेल का दीपक, काले तिल, फूल और नैवेद्य अर्पित करें।
  3. 'ॐ काल भैरवाय नमः' मंत्र का जाप करें और कालभैरवाष्टकम् का पाठ करें।
  4. भैरव पूजा में रात्रि का समय विशेष माना जाता है; संभव हो तो रात को भी दीपक और पाठ करें।
  5. भैरव जी का वाहन श्वान है — परंपरा में इस दिन कुत्तों को भोजन कराया जाता है।

काल भैरव कौन हैं?

शिव पुराण की शतरुद्र संहिता (अध्याय 8) में भैरव अवतार का वर्णन है। कथा के अनुसार ब्रह्मा जी के अहंकार को दूर करने के लिए शिव जी से भैरव प्रकट हुए और उन्होंने ब्रह्मा जी का पाँचवाँ सिर काट दिया। ब्रह्महत्या के दोष से मुक्ति भैरव को काशी में मिली, इसलिए वे काशी के कोतवाल (रक्षक) माने जाते हैं और काशी विश्वनाथ के दर्शन से पहले काल भैरव के दर्शन की परंपरा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

kaal bhairav jayanti 2026 kab hai?

मंगलवार, 1 दिसंबर 2026।

काल भैरव जयंती 2026 अष्टमी तिथि कब से कब तक है?

1 दिसंबर रात 12:11 बजे से 1 दिसंबर रात 11:13 बजे तक (नई दिल्ली)।

काल भैरव जयंती पर क्या करें?

शिव जी और काल भैरव की पूजा, सरसों के तेल का दीपक, 'ॐ काल भैरवाय नमः' का जाप, कालभैरवाष्टकम् का पाठ, और कुत्तों को भोजन।

काल भैरव को क्या भोग लगाएँ?

प्रचलित परंपरा में इमरती, जलेबी, उड़द से बने पकवान, काले तिल और नारियल का भोग लगाया जाता है। अपनी स्थानीय परंपरा का पालन करें।

काल भैरव जयंती और कालाष्टमी में क्या अंतर है?

हर महीने की कृष्ण अष्टमी कालाष्टमी कहलाती है। मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी को भैरव का प्राकट्य माना जाता है, इसलिए इसे काल भैरव जयंती कहते हैं।

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स्रोत

सभी तिथियाँ और मुहूर्त नई दिल्ली के अनुसार हैं; आपके शहर में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है। स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।